9 अक्टूबर 2026 · सिकंदरपुर, बलिया

हिंदी समाचार

Jagran Express

ताज़ा खबरें, सबसे पहले

हिंदी संस्करणसिकंदरपुर, बलिया
सुर्खियाँ
ताजा खबर

चतुर्भुज नाथ मंदिर के विकास के लिए शासन ने अवमुक्त किया धन

चतुर्भुज नाथ मंदिर के विकास के लिए शासन ने अवमुक्त किया धन 1.9976 करोड़ से होना है सुंदरीकरण कार्य पहली किस्त के रूप में मिला 99.89 लाख सिकन्दरपुर(बलिया)सिकंदरपुर कस्बा स्थित चतुर्भुजनाथ मंदिर परिसर के विकास के लिए शासन ने प्रथम किस्त के रूप में 99.89 लाख रुपए अवमुक्त

चतुर्भुज नाथ मंदिर के विकास के लिए शासन ने अवमुक्त किया धन

चतुर्भुज नाथ मंदिर के विकास के लिए शासन ने अवमुक्त किया धन

  • 1.9976 करोड़ से होना है सुंदरीकरण कार्य
  • पहली किस्त के रूप में मिला 99.89 लाख

सिकन्दरपुर(बलिया)सिकंदरपुर कस्बा स्थित चतुर्भुजनाथ मंदिर परिसर के विकास के लिए शासन ने प्रथम किस्त के रूप में 99.89 लाख रुपए अवमुक्त कर दिया है। जबकि मंदिर के विकास पर 1 करोड़ 99 लाख 76 हजार रूपये खर्च किया जाना है। जल्द ही नगर पालिका प्रशाासन की तरफ से मंदिर परिसर का सुंदरीकरण समेत अन्य कार्य कराया जाएगा। इसकी कवायद भी शुरू कर दी गई है।
शासन स्तर पर वंदन योजना के तहत जिले के दो धार्मिक स्थलों का चयन किया गया था। इसमें नगर पंचायत सिकंदरपुर के डोमनपुरा स्थित चतुर्भुज नाथ मंदिर और बैरिया का एक मंदिर शामिल था। बैरिया स्थित मंदिर के लिए भी शासन से एक करोड़ रुपए जारी कर दिया गया है। पौराणिक महत्व के उक्त दोनों मंदिरों का विकास 399.78 लाख रूपये खर्च किया जाना है।
शासन से मिली धनराशि से परिसर का सौंदर्यीकरण के साथ मंदिर परिसर में यात्री निवास भवन और ओपन हाल का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा कठौड़ा मुख्य मार्ग से मंदिर गेट तक सीसी रोड, पटरियों पर इंटरलाकिंग कार्य तथा मंदिर परिसर में गैरेज निर्माण के साथ टाइल्स मरम्मत का कार्य भी कराया जाएगा।
300 साल पुराना है मंदिर का इतिहास
कस्बा के डोमनपुरा स्थित चतुर्भुज नाथ मंदिर का इतिहास लगभग 300 साल पुराना है। जिसका संबंध राजा सुरथ से जोड़ा जाता है। जनश्रुतियों के अनुसार मंदिर प्रांगण के जलस्रोत से ही राजा सुरथ को कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली थी। उक्त जल स्रोत की खुदाई के दौरान ही चतुर्भुज नाथ की सोने की प्रतिमा मिली थी। अपने चमत्कारिक प्रभाव के कारण दूर दराज से लोग मंदिर में दर्शन पूजन करने के साथ ही धार्मिक आयोजन कराने के लिए आते हैं। इसके साथ ही मंदिर से शादी एवं अन्य मांगलिक कार्यक्रम कराने वालों का भी आना जाना रहता है। अपने सांस्कृतिक, पौराणिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के कारण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने जिले के दो मंदिरों को चयनित कर शासन को भेजा था। शासन द्वारा धन स्वीकृत होने से इसका समुचित विकास तो होगा ही साथ ही क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस खबर को साझा करें