सिकंदरपुर (बलिया): पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि स्व. बाबू राजू राम को हजारों लोगों ने दी विदाई, सेवा और समानता का दिया संदेश। रविवार का दिन सिकंदरपुर तहसील के संदवापुर गांव के लिए भावनाओं और आंसुओं से भरा हुआ था।
गांव में एक ऐसा अद्वितीय दृश्य देखने को मिला, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति के दिल को छू लिया। नेपाल, लुम्बिनी, बोधगया, कुशीनगर और सारनाथ सहित देश-विदेश से सैकड़ों बौद्ध भिक्षु गांव पहुंचे। अवसर था — पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि और लोकप्रिय समाजसेवी स्व. बाबू राजू राम की श्रद्धांजलि सभा का, जिनका 31 जुलाई को निधन हो गया था।
उनके निधन की खबर ने न केवल गांव, बल्कि पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी थी। अपनी सादगी, गहरी सामाजिक सोच और जरूरतमंदों के लिए निःस्वार्थ मदद के कारण वे हर दिल में जगह बनाए हुए थे।
पारंपरिक स्वागत और आध्यात्मिक माहौल
रविवार सुबह से ही उनके आवास पर लोगों का तांता लगना शुरू हो गया। सभा में पहुंचे सभी बौद्ध भिक्षुओं का स्वागत उनके पुत्र डॉ. जयप्रकाश , इंजीनियर चंद्रशेखर, चंद्रभान और सूर्यभान ने पारंपरिक रीति से किया।
पीले वस्त्रों में सजे भिक्षुओं ने जब शांति पाठ का आरंभ किया, तो वातावरण एकदम आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण हो उठा। मंत्रों की गूंज और धीमे ढोल की थाप मानो पूरे गांव को आंतरिक सुकून का एहसास करा रही थी।
समाज के लिए जीवनभर समर्पण

कार्यक्रम में वक्ताओं ने भावुक होकर कहा कि बाबू राजू राम ने जीवनभर जात-पात और भेदभाव को दूर रखने की मिसाल पेश की। वे सभी को समान दृष्टि से देखते थे और गरीबों, वंचितों के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। शिक्षा के प्रसार, सड़क निर्माण और सामाजिक जागरूकता जैसे कार्यों में उनका योगदान यादगार रहेगा।
विशेष अतिथि और जनसैलाब
इस मौके पर सेवानिवृत्त डीआईजी एस. के. गौतम, एडीएम एटा शिवकुमार, पूर्व मंत्री राजधारी, इंजीनियर चंद्रशेखर, चंद्रभान, सूर्यभान, सुनील, अमरदेव राम, अमरेश राम, महेंद्र कुमार, कमलेश कुमार, सुनील कुमार, मुनीलाल राजभर, जितेंद्र भारती समेत कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और व्यापारी मौजूद रहे। आसपास के गांवों से भी हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
परिवार का दुख और लोगों की संवेदनाएं
पूरे कार्यक्रम के दौरान उनका परिवार — पुत्र, पौत्र दिलीप, दीपक, दीपू और अक्षत — शोक में डूबा रहा। लोग उन्हें सांत्वना देते हुए पुराने किस्से और यादें साझा कर रहे थे। हर चेहरे पर यह भाव साफ था कि वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और सेवा भाव के प्रतीक थे।
सेवा के संकल्प के साथ विदाई
सभा के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और यह संकल्प लिया कि बाबू राजू राम के आदर्शों पर चलकर वे भी समाज सेवा में योगदान देंगे।
अंतिम क्षण श्रद्धांजलि सभा
कार्यक्रम के समापन पर भावुक माहौल में डॉ. जयप्रकाश ने मंच से सभी उपस्थित अतिथियों, बौद्ध भिक्षुओं, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा आप सभी का यहां आना हमारे परिवार के लिए अपार सांत्वना है।

मेरे पिताजी स्व. बाबू राजू राम का पूरा जीवन समाज सेवा और मानवता के लिए समर्पित रहा। आज आप सभी का प्रेम और आशीर्वाद हमारे लिए प्रेरणा है। हम सभी उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास करेंगे। इसके बाद डॉ. जयप्रकाश ने मंच से अपने पिताजी की तस्वीर की ओर देखा, उन्हें नमन किया और आंखों में नमी लिए मंच से उतर गए। पूरे माहौल में सन्नाटा और भावनाओं की गहरी लहर महसूस हो रही थी।